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यिर्मयाह 47

पलििपरमशरसन

1 िजरपलििशईर ितणपईलिमयभवियबकपलिियहवचन पऊा, 2 यहाँ , "ो, एक मण उततर िआऊण़ी ़ा ़ी नदि़े पलिििसबसमि, ओर रण़ेशईर डबा, ूं मतिींगणे, बलि सबरण़ेय-हकरनी। 3 मणगतबर ़े, रथचलणओर िटईरचलणि आथ-पएड़े ऊई ि ूँ ़ी आपणबचपनि खणे। 4 कऊि पलििऊणिआऊण़ा ओर ओर िशईरबचमतदगखतऊई े, कऊि यहपलििकपसम47:4 कप्तोर नाओं रे समुद्रो क्रेते द्वीप कनबचरण़े , िकरऩा 5 िकटे, अशकलपलििकलरया, खतकरा, ां कदतक आपणशररदरणा?47:5 ये संदर्भ शोगो खे बऊत ई दु:खो री नशाणिया रे रूपो दे बताणे खे ए। " 6 पलििो, , यहतलव, ूँ कदतक ि ऊणी? ूँ आपणा, ओर ा! 7 पर यहतलविंाँ सक? कऊि यहआजअशकलओर समकनरण़े खलठरी।

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