3 संतान याहवेह के दिए हुए निज भाग होते हैं,
तथा बालक उनका दिया हुआ उपहार.
4 युवावस्था में उत्पन्न हुई संतान वैसी ही होती है,
जैसे योद्धा के हाथों में बाण.
5 कैसा धन्य होता है वह पुरुष,
जिसका तरकश इन बाणों से भरा हुआ है!
नगर द्वार पर शत्रुओं का प्रतिकार करते हुए
उन्हें लज्जित नहीं होना पड़ेगा.