13 आपने ही मेरे आन्तरिक अंगों की रचना की;
मेरी माता के गर्भ में आपने मेरी देह की रचना की.
14 मैं आपके प्रति कृतज्ञ हूं, क्योंकि आपने मेरी रचना भयानक एवं अद्भुत ढंग से की है;
आश्चर्य हैं आपके कार्य,
मेरे प्राणों को इसका पूर्ण बोध है.
13 आपने ही मेरे आन्तरिक अंगों की रचना की;
मेरी माता के गर्भ में आपने मेरी देह की रचना की.
14 मैं आपके प्रति कृतज्ञ हूं, क्योंकि आपने मेरी रचना भयानक एवं अद्भुत ढंग से की है;
आश्चर्य हैं आपके कार्य,
मेरे प्राणों को इसका पूर्ण बोध है.