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स्तोत्र 142

मसक142:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द रचनइस समय वह कनदरें े. एक अभयरथन

1 ैं अपनवर उठकर हवथनकर रहूं;

अपनशबों ें हवअनकर रहूं.

2 ैं उनकमनअपनकट रहूं;

ैंअपनकषउनकमनरख िैं.

3 जब ैं णतूं,

आपकमनियति पषरहतै.

वह पथ िपर ैं चल रहूं

उनोंउसपर ििैं.

4 ीं ओर ि िऔर ि

िनहीं ै;

आशरय अब नहीं रह गयै,

िों ितचिंनहीं ै.

5 हव, ैं आपकरहूं;

ैं िकरतरहतूं, "आशरय आप ैं,

िों ें ."

6 पर ि,

ोंि ैं अब थक ूं;

उनस़ा ि, ुःिकर रहैं,

झसकहीं अधिबलवैं.

7 इस ़ा ि,

ि ैं आपकमहिरति कणआभयककर सकूं.

तब गति धरिों सक

ोंि रति यह आपकउपका.

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