1 परमेश्वर हमारे आश्रय-स्थल एवं शक्ति हैं,
संकट की स्थिति में सदैव उपलब्ध सहायक.
2 तब हम भयभीत न होंगे, चाहे पृथ्वी विस्थापित हो जाए,
चाहे पर्वत महासागर के गर्भ में जा पड़ें,
3 हां, तब भी जब समुद्र गरजना करते हुए फेन उठाने लगें
और पर्वत इस उत्तेजना के कारण थर्रा जाएं.
6 राष्ट्रों में खलबली मची हुई है, राज्य के लोग डगमगाने लगे;
परमेश्वर के एक आह्वान पर, पृथ्वी पिघल जाती है.
10 परमेश्वर कहते हैं, "समस्त प्रयास छोड़कर यह समझ लो कि परमेश्वर मैं हूं;
समस्त राष्ट्रों में मेरी महिमा होगी,
समस्त पृथ्वी पर मेरी महिमा होगी."