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स्तोत्र 46:1-3,6,10

OHSS Hindi Contemporary Version

1 परमेश्वर हमारे आश्रय-स्थल एवं शक्ति हैं,

संकट की स्थिति में सदैव उपलब्ध सहायक.

2 तब हम भयभीत न होंगे, चाहे पृथ्वी विस्थापित हो जाए,

चाहे पर्वत महासागर के गर्भ में जा पड़ें,

3 हां, तब भी जब समुद्र गरजना करते हुए फेन उठाने लगें

और पर्वत इस उत्तेजना के कारण थर्रा जाएं.

6 राष्ट्रों में खलबली मची हुई है, राज्य के लोग डगमगाने लगे;

परमेश्वर के एक आह्वान पर, पृथ्वी पिघल जाती है.

10 परमेश्वर कहते हैं, "समस्त प्रयास छोड़कर यह समझ लो कि परमेश्वर मैं हूं;

समस्त राष्ट्रों में मेरी महिमा होगी,

समस्त पृथ्वी पर मेरी महिमा होगी."

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    1 परमेश्‍वर हमारा शरणस्थान और बल है,

    संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।

    2 इसलिए हम नहीं डरेंगे,

    चाहे पृथ्वी उलट जाए,

    और पर्वत समुद्र के बीच जा गिरें;

    3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए,

    और उसके उमड़ने से पर्वत काँप उठें।

    सेला।

    6 जातियों ने हुल्लड़ मचाया,

    राज्य लड़खड़ाए;

    वह बोल उठा,

    और पृथ्वी पिघल गई।

    10 "शांत हो जाओ, और जान लो

    कि मैं ही परमेश्‍वर हूँ।

    जातियों के मध्य मैं महान ठहरूँगा;

    समस्त पृथ्वी पर भी मैं महान ठहरूँगा।"

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,

    संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक46:1 संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक: यहाँ सहायक अर्थात्, सहयोग एवं सहकारिता। संकट: अर्थात् तनाव और दुःख देनेवाली सब परिस्थितियाँ। ।

    2 इस कारण हमको कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी

    उलट जाए,

    और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएँ;

    3 चाहे समुद्र गरजें और फेन उठाए,

    और पहाड़ उसकी बाढ़ से काँप उठे। (सेला) (लूका 21:25, मत्ती 7:25)

    6 जाति-जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य-राज्य

    के लोग डगमगाने लगे;

    वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। (प्रका. 11:18, भज. 2:1)

    10 "चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ46:10 जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ: देखो मैंने क्या-क्या किया जो मेरे परमेश्वर होने का प्रमाण है।।

    मैं जातियों में महान हूँ,

    मैं पृथ्वी भर में महान हूँ!"

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