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स्तोत्र 51

4 वसैंआपके, आपकििै,

ैंवहिै, आपकि ें ै;

तब जब आप अपनअनैं,

यह हर ि गत एवउपयै.

5 इसमें नहीं ि ैं जनसमय ूं,

ां, उसषण े, जब गरें रण िा.

6 यह ें ैं ि आपकयह अभिै, ि हमआतें सतो;

तब आप करण ें भलरदकरेंे.

7 ़ा टहनवचकरें, ैं ा;

ि, तब ैं िअधिा.

8 झमें हरएवआनि;

ि हडिां िें आपनचल ैं, मगन उठें.

9 ों अपनि कर ि

और समसअपरिि.

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