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स्तोत्र 55

12 यदि शतिंकरतयह,

िसहनै;

यदि ििउठ खड़ा ो,

ैं उससिसकतूं.

13 िंयहां , ी, परम ि,

शतगए ैं, रहैं,

14 ैंगति ल-मिअवसरों आनिा,

अनआरधकों

हम

परमवर भवन े.

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