12 यदि शत्रु मेरी निंदा करता तो यह,
मेरे लिए सहनीय है;
यदि मेरा विरोधी मेरे विरुद्ध उठ खड़ा हो तो,
मैं उससे छिप सकता हूं.
13 किंतु यहां तो तुम, मेरे साथी, मेरे परम मित्र,
मेरे शत्रु हो गए हैं, जो मेरे साथ साथ रहे हैं,
14 तुम्हारे ही साथ मैंने संगति के मेल-मिलाप अवसरों का आनंद लिया था,
अन्य आराधकों के साथ
हम भी साथ साथ
परमेश्वर के भवन को जाते थे.