परमेश्वर के प्रिय पात्र मोशेह की एक प्रार्थना
1 प्रभु, समस्त पीढ़ियों में
आप हमारे आश्रय-स्थल बने रहे हैं.
2 इसके पूर्व कि पर्वत अस्तित्व में आते
अथवा पृथ्वी तथा संसार की रचना की जाती,
अनादि से अनंत तक परमेश्वर आप ही हैं.
1 प्रभु, समस्त पीढ़ियों में
आप हमारे आश्रय-स्थल बने रहे हैं.
2 इसके पूर्व कि पर्वत अस्तित्व में आते
अथवा पृथ्वी तथा संसार की रचना की जाती,
अनादि से अनंत तक परमेश्वर आप ही हैं.