147 दोत्ती मांगा हुंह दोत्थी ताखा अरज़ करी मज़त,
हुंह रहा तेते आसरै ज़ुंण तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
148 हुंह रहा सारी राची बिहुदअ,
संघा रहा हुंह तेरी गल्ले बच़ार करदअ लागी।
147 दोत्ती मांगा हुंह दोत्थी ताखा अरज़ करी मज़त,
हुंह रहा तेते आसरै ज़ुंण तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
148 हुंह रहा सारी राची बिहुदअ,
संघा रहा हुंह तेरी गल्ले बच़ार करदअ लागी।
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