8 धैल़ लोल़ी मुंह दोत्ती तेरी अटल़ झ़ूरी आद फिरी,
किल्हैकि हुंह रहा तेरै आसरै।
हुंह सभाल़ा आपणीं सोभै गल्ला ताखा,
तूह खोज़ मुखा आप्पै कि हुंह कैहा बाता हांढूं।
8 धैल़ लोल़ी मुंह दोत्ती तेरी अटल़ झ़ूरी आद फिरी,
किल्हैकि हुंह रहा तेरै आसरै।
हुंह सभाल़ा आपणीं सोभै गल्ला ताखा,
तूह खोज़ मुखा आप्पै कि हुंह कैहा बाता हांढूं।