दोत्ती बोल़णैंओ भज़न
1 हे बिधाता, मेरै हुऐ खास्सै दुशमण!
मुंह संघै लागै खास्सै झ़घल़दै!
2 कई आसा इहअ बोल्दै लागै दै,
"बिधाता निं एऊ बच़ाऊंदअ च़ाल्लअ एछी!"
3 पर हे बिधाता, खातरै का हर बगत बच़ाऊंणा लै आसा
तूह ई मेरी ढाल़
तूह ई आसा मेरी इज़त ज़ुंण मुंह हर बगत ज़ीत दैआ।
4 हुंह करा ताह बिधाता सेटा ज़ोरै-ज़ोरै अरज़
अर तूह दैआ मुल्है तेरी पबित्र धारा का ज़बाब।
5 हुंह सुत्ता राची निहंचै निंजा
किल्हैकि तूह बिधाता करा मेरी फाज़त।
6 फेरा-फेर मुंह हारदै-मारदै आऐ दै
हज़ारो दुशमणा का निं हुंह डरदअ।