2 मुखा निं ऐबै आशा ई शुझदी,
हुंह मांगा ताखा आपणैं देशा का दूर रही लेर-पकार पाई मज़त।
तूह बशैल़ मुंह तैहा बडी टोल्हा पिछ़ू ज़ेथ हुंह शरण लई सके।
2 मुखा निं ऐबै आशा ई शुझदी,
हुंह मांगा ताखा आपणैं देशा का दूर रही लेर-पकार पाई मज़त।
तूह बशैल़ मुंह तैहा बडी टोल्हा पिछ़ू ज़ेथ हुंह शरण लई सके।