5 मेरे प्राण, शांत होकर परमेश्वर के उठने की प्रतीक्षा कर;
उन्हीं में तुम्हारी एकमात्र आशा मगन है.
6 वही मेरे लिए एक स्थिर चट्टान और मेरा उद्धार हैं;
वह मेरे सुरक्षा-रच हैं, अब मेरा विचलित होना संभव नहीं.
7 मेरा उद्धार और मेरा सम्मान परमेश्वर पर अवलंबित हैं;
मेरे लिए वह सुदृढ़ चट्टान तथा आश्रय-स्थल है.
8 मेरे लोगो, हर एक परिस्थिति में उन्हीं पर भरोसा रखो;
उन्हीं के सम्मुख अपना हृदय उंडेल दो,
क्योंकि परमेश्वर ही हमारा आश्रय-स्थल हैं.