1 मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता,
और ख़ताकारों की राह में खड़ा नहीं होता;
और ठट्ठा बाज़ों की महफ़िल में नहीं बैठता।
2 बल्कि ख़ुदावन्द की शरी’अत में ही उसकी ख़ुशी है;
और उसी की शरी’अत पर दिन रात उसका ध्यान रहता है।
1 मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता,
और ख़ताकारों की राह में खड़ा नहीं होता;
और ठट्ठा बाज़ों की महफ़िल में नहीं बैठता।
2 बल्कि ख़ुदावन्द की शरी’अत में ही उसकी ख़ुशी है;
और उसी की शरी’अत पर दिन रात उसका ध्यान रहता है।