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ज़बूर 77

1 ैं लनआव़ुमनिकरूँ़ुमनलनआवे,

और वह तरफलगएगा।

2 अपनबत िैं़ुवनूँा,

रहऔर ;

तस

3 ैं ़ुकरतूँ

और ूँ ैं करतूँ और िै।

4 ें रखतै;

ैं ऐसूँ ि नहीं सकता।

5 ैं िों पर,

ा’बरसों पर चतरहा।

6 अपनहमआतै;

ैं अपनिें चतूँ।

बड़ी तफ़्ें लगै:

7 "़ुवनहमिा?

वह िकभेंहरबा?

8 उसकशफहमिरही?

उसका’हमतक िगया?

9 ़ुकरम करनगया?

उसनहर अपनरहमत ी?" ि

10 िैंकहा, "यह कमज़ोै;

ैं हका’दरत करूँा।"

11 ैं ़ुवनों ़िकरूँा;

ूँि 'अजईब दआएे।

12 ैं सन’अत पर करूँा,

और ों ूँा।

13 ़ुा, मकिें ै।

वत़ुतरह बड़ा ै।

14 वह ़ु'अजकरतै,

़ौों अपऩुदरत ़ािी।

15 अपऩू अपऩौ,

बना’़ूऔर बऩििकर ़ाै।

16 ़ुा, समनदरों ा,

समनदर कर डर गए,

गहराँउठे।

17 बदलिों बरसा,

आसमों आवआई,

ों तरफचले।

18 बगें गरजआवी,

बरजहशन कर िा,

लरज़ी और ाँी।

19 समनदर ें ै,

बड़े समदरों ें ैं;

और नक़्दम ा’ैं।

20 और वसे,

़ि’तरह अपनों रहनी।

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