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ज़बूर 21

1 ़ुवन! दशु़ा;

और नजउसबह़ुी।

2 उसकिआरज़ू ै,

और उसकुँदरख़्नहीं िा। ि;

3 ूँि उस'उमबरकतें बख़्शनें कदमकरता,

और ़ािउसकिपर रखतै।

4 उसऩिदगऔर बख़्ी;

बलि उमदऱी हमि

5 नजवजह उसककत 'अज़ीै;

उसहशमत जलआरकरतै।

6 ूँि हमिउसबरकतों करतै;

और अपनमनउस़ु़ुरम रखतै।

7 ूँि दशभऱुवनपर ै;

और हका’शफबदलत उसहरगििी।

8 सब मनों ूंिा,

दहनरखनों पतलगा।

9 अपनहर वक़्उनकजलततनतरह कर ा।

़ुवनअपनें उनकिगल एगा,

और आग उनकएगी।

10 उनकफल पर बरकर ा,

और उनकनसल बनआदम ें े।

11 ूँि उनोंबदकरना,

उनोंऐसमनाँिवह नहीं कर सकते।

12 ूँि उनकुँा,

उनक़ाबलें अपनिचढ़ाएगा।

13 ़ुवन, अपनें सरबलनो!

और हम कर ़ुदरत िइश करेंे।

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