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ज़बूर 5

1 ़ुवनपर लगा!

आहों पर तवजकर!

2 दश! ़ुा! िआवतरफतवजिो,

ूँि ैं करतूँ।

3 ़ुवनबह आवा।

ैं सवकरकइनि़ाकरूँा।

4 ूँि ऐस़ुनहीं शररत ु़ो।

नहीं रह सकता।

5 घममनखड़े ोंे।

सब बदकिरदों नफरत ै।

6 उनकलतैं हलकरा।

़ुवनू़ँ़्और दग़ाआदमनफरत ै।

7 िैं शफकसरत घर ें आऊा।

ैं ौ’नकर कल तरफकरकिकरूँा।

8 ़ुवन! मनों वजह अपनसदें चला;

आगआगअपनकर े।

9 ूँि उनकुँें सचनहीं, उनकििै।

उनकगलै, वह अपऩुमद करतैं।

10 ़ुउनकजरिठहरा;

वह अपनमशवरों तबों।

उनकउनकों ़्दतवजह ़ािकर े;

ूँि उनोंबग़ावत ै।

11 िवह सब पर भररखतैं, दमों,

वह सद़ुललकें, ूँि उनकियत करतै।

और हबबत रखतैं, ें ़ुरहें।

12 ूँि िबरकत बख़्ा।

़ुवन! उसकरम तरह ाँा।

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