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ज़बूर 49

1 सब उममतो, यह ो।

जहसब िो, लग!

2 अदनआ’ला,

अम

3 ुँिकमत ें िकलेंी,

और ि़िरद ा।

4 ैं तमतरफलगा,

ैं अपनिपर बयकरूँा।

5 ैं बत िों ें ूँ डरूं,

जब करनबदो?

6 अपनलत पर भररखते,

और अपनकसरत पर ़्करतैं;

7 उनमें ितरह अपऩििनहीं सकता,

़ुउसकु’आवज़ा सकतै।

8 ूँि उनक़िि़ीमत ै;

वह हमतक अदा।

9 ि वह हमतक ़िरहऔर े।

10 ूँि वह खतै, ि िशममर ैं,

वकू़सलत एक हलैं,

और अपनलत औरों िैं।

11 उनकियह ि उनकघर हमतक,

और उनकघर नसल दर नसल बनरहेंे;

वह अपनअपनमजकरतैं।

12 पर इज़्लत ें ़ाईम नहीं रहतवह नवरों तरह ै,

ो, ैं।

13 उनकयह उनकवक़ू़ी ै,

उनकउनकों पसकरतैं। ि

14 वह वडठहरगए ैं;

उनकसबी;

िनतदबह उन पर सललत ा,

और उनक़्कर िा।

15 ि़ुइख़्ि़ा ा,

ूँि वहु़करा। ि

16 जब लदजब उसकघर हशमत बढ़े,

़ौकर

17 ूँि वह मरकर एगा;

उसकहशमत उसकएगी।

18 वह अपनरक कहतरह

और जब अपनभलकरतकरतैं

19 वह अपनििा,

वह शनहरगिेंे।

20 आदम'इज़्लत ें रहतै,

ि'अक़्नहीं रखतनवरों तरह ै,

ैं।

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