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ज़बूर 140

1 ़ुवन! आदमिबख़्;

़े आदममहफरख

2 िें शररत मनाँधतैं;

वह हमिलकर िजमा' ैं।

3 उनोंअपनाँतरह कर रखै।

उनकों अजदहहर ै।

4 ़ुवन! शरबच़े आदममहफरख,

िनकइरि ाँउखें।

5 मगों िऔर रसिों िै,

उनोंिलगै;

उनोंििरखैं। ि

6 ैं़ुवनकहा,

़ुै। ़ुवन,

इलिआवपर लगा।

7 ़ुवनि, नज,

ििपर िै।

8 ़ुवन, शरकर,

उसकमनि वह ींे। ि

9 रनों ुँशररत,

उनीं िपर पड़े।

10 उन पर िें! वह आग ें ँ!

और ऐसगढ़ों ें ि िउठे।

11 बदजआदमपर ा।

आफ़े आदम़ा कर हलकरी।

12 ैं नतूँ ि ़ुवनतजु’आमिी,

और हतहकईद करा।

13 यक़ीनन िकरेंे,

और तबमनें रहेंे।

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