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ज़बूर 110

1 यह़ुवनकहा,

"जब तक ि ैं मनों ाँकर ूँ।"

2 ़ुवऩो'असिा।

अपनमनों ें मरकर

3 लशकरकशि़ुअपनआप करतैं;

जवआरइश ें ैं,

और बह बतशबनम तरह

4 ़ुवनसम और िनहीं,

"मलििपर हमतक िै।"

5 ़ुवनदहनपर

अपनकहर िदशों ा।

6 वह ़ौों ें 'अदलत करा,

वह ों लगा; और बहों ें िों चला।

7 वह ें नदिएगा;

इसलिवह िलनकरा।

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