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ज़बूर 85

1 ़ुवनअपनपर हरबरहै।

ा’़ू़ुपस ै।

2 अपनों बदकु’आफकर ै;

उनकसब ाँिैं।

3 अपनिउठिा;

अपनहर शदआयै।

4 हमनज़ुा!

हम बहकर, अपनहम कर!

5 हमहम रहा?

अपनहर नसल दर नसल रखा?

6 हम ि़िकरा,

ि ें ़ुों?

7 ़ुवन! अपनशफहमकिा,

और अपननजहम बख़्

8 ैं ूँि ़ुवऩुरमै।

ूँि वह अपनों और अपनों सलमतें करा;

िवह िितरफकरें।

9 यक़ीनन उसकनजउससडरनों ै,

ि जलहमें बसे।

10 शफऔर एक िगई ैं,

सदऔर सलमतएक सरिै।

11 िकलतै,

और सदआसमपर ाँकतैं।

12 अचवह़ुवनअतरमएग

और हमअपनी।

13 सदउसकआगआगचली,

उसकनक़्दम हमबनएगी।

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