2 बल्कि ख़ुदावन्द की शरी’अत में ही उसकी ख़ुशी है;
और उसी की शरी’अत पर दिन रात उसका ध्यान रहता है।
3 वह उस दरख़्त की तरह होगा, जो पानी की नदियों के पास लगाया गया है।
जो अपने वक़्त पर फलता है, और जिसका पत्ता भी नहीं मुरझाता।
इसलिए जो कुछ वह करे फलदार होगा।