1 ऐ मेरी जान! ख़ुदावन्द को मुबारक़ कह;
और जो कुछ मुझमें है उसके पाक नाम को मुबारक़ कहें
2 ऐ मेरी जान! ख़ुदावन्द को मुबारक़ कह
और उसकी किसी ने’मत को फ़रामोश न कर।
3 वह तेरी सारी बदकारी को बख़्शता है
वह तुझे तमाम बीमारियों से शिफ़ा देता है
4 वह तेरी जान हलाकत से बचाता है,
वह तेरे सर पर शफ़क़त व रहमत का ताज रखता है।