24 ऐ ख़ुदावन्द, तेरी कारीगरी कैसी बेशुमार हैं।
तूने यह सब कुछ हिकमत से बनाया;
ज़मीन तेरी मख़लूक़ात से मा’मूर है।
24 ऐ ख़ुदावन्द, तेरी कारीगरी कैसी बेशुमार हैं।
तूने यह सब कुछ हिकमत से बनाया;
ज़मीन तेरी मख़लूक़ात से मा’मूर है।
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