1 मुबारक है हर एक जो ख़ुदावन्द से डरता,
और उसकी राहों पर चलता है।
2 तू अपने हाथों की कमाई खाएगा;
तू मुबारक और फ़र्माबरदार होगा।
3 तेरी बीवी तेरे घर के अन्दर मेवादार ताक की तरह होगी,
और तेरी औलाद तेरे दस्तरख़्वान पर ज़ैतून के पौदों की तरह।
1 मुबारक है हर एक जो ख़ुदावन्द से डरता,
और उसकी राहों पर चलता है।
2 तू अपने हाथों की कमाई खाएगा;
तू मुबारक और फ़र्माबरदार होगा।
3 तेरी बीवी तेरे घर के अन्दर मेवादार ताक की तरह होगी,
और तेरी औलाद तेरे दस्तरख़्वान पर ज़ैतून के पौदों की तरह।