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Salmos 132

1 ़ुवन! ऊद ि ़ािउसकसब बतों कर;

2 ि उसनितरह ़ुवनसम ,

और ा’़ू़ािमनमननत ी,

3 "यक़ीनन ैं अपनघर ें ़िूँा,

अपनपलपर ा;

4 और अपनों ें ीं,

अपनपलकों ें झपकआनूँा;

5 जब तक ़ुवनिजगह,

और ा’़ू़ाििघर ो।"

6 ो, हम उसकबर इफ़्ें ी;

हमें यह गल ें िी।

7 हम उसकघरों ें ि़ोंे,

हम उसकाँमनिजदकरेंे!

8 उठ, ़ुवन! अपनआरमगें ि़ो!

और ु़दरत ़।

9 िसदलबबस ों,

और ़ुें।

10 अपनबनऊद ़ाि,

अपनमममनकर

11 ़ुवनसचऊद सम ै;

वह उससिरननहीं:ि "ैं औलें ितख़्पर िा।

12 अगर 'अहद और शहदत पर,

ैं उनकि'अमल करें;

उनकहमतख़्पर ें।"

13 ूँि ़ुवनिै,

उसनउसअपनघर िपसनिै:

14 "यह हमिआरमगै;

यहीं रहूँूँि ैंइसपसिै।

15 ैं इसकिें ़ूबरकत ूँा;

ैं इसकों करूँ

16 इसकिों ैं नजलववस करूँ

और उसकलनआव़ुेंे।

17 वहीं ैं ऊद िएक ींिूँैं

अपनममिचरिै।

18 ैं उसकमनों शरिदगिपहना,

िउस पर उसनक अफा।"

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