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ज़बूर 141

1 ़ुवन! तरफजल!

जब ैं करूँ, आवपर लगा!

2 मऩुशबतरह ो,

और उठु़तरह!

3 ़ुवन! ुँपर पहरिा;

लबों दरवे़ िगहबकर

4 िितरफइल े;

ि बदकों िलकर, शररत ों ें मसर,

और उनकनफ़ीरख

5 िहरबी,

वह तमकरिपर ा।

िइससकरे,

ूँि उनकशररत ें ैं करतरहूँा।

6 उनकिचटिों पर ििगए ैं,

और वह ें ेंे, ूँि यह ैं।

7 हल चलकर ै,

हमहडिाँ ुँपर िखरपड़ी ैं।

8 ूँि ि़ुवन! ें तरफैं;

भरपर ै, कस ़!

9 उस उनोंिलगै,

और बदकिरदों बचा।

10 शरआप अपनें ें,

और ैं सलमत बच िकलूँ।

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