1 ख़ुदावन्द मेरी चट्टान मुबारक हो,
जो मेरे हाथों को जंग करना,
और मेरी उँगलियों को लड़ना सिखाता है।
2 वह मुझ पर शफ़क़त करने वाला, और मेरा क़िला' है;
मेरा ऊँचा बुर्ज और मेरा छुड़ाने वाला,
वह मेरी ढाल और मेरी पनाहगाह है;
जो मेरे लोगों को मेरे ताबे' करता है।