3 न उमरा पर भरोसा करो न आदमज़ाद पर,
वह बचा नहीं सकता।
4 उसका दम निकल जाता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है;
उसी दिन उसके मन्सूबे फ़ना हो जाते हैं।
5 खु़श नसीब है वह, जिसका मददगार या’क़ूब का ख़ुदा है,
और जिसकी उम्मीद ख़ुदावन्द उसके ख़ुदा से है।
3 न उमरा पर भरोसा करो न आदमज़ाद पर,
वह बचा नहीं सकता।
4 उसका दम निकल जाता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है;
उसी दिन उसके मन्सूबे फ़ना हो जाते हैं।
5 खु़श नसीब है वह, जिसका मददगार या’क़ूब का ख़ुदा है,
और जिसकी उम्मीद ख़ुदावन्द उसके ख़ुदा से है।
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