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ज़बूर 148:1-13

1 ख़ुदावन्द की हम्द करो!

आसमान पर से ख़ुदावन्द की हम्द करो,

बुलंदियों पर उसकी हम्द करो!

2 ऐ उसके फ़िरिश्तो! सब उसकी हम्द करो।

ऐ उसके लश्करो! सब उसकी हम्द करो!

3 ऐ सूरज! ऐ चाँद! उसकी हम्द करो।

ऐ नूरानी सितारों! सब उसकी हम्द करो

4 ऐ फ़लक — उल — फ़लाक! उसकी हम्द करो!

और तू भी ऐ फ़ज़ा पर के पानी!

5 यह सब ख़ुदावन्द के नाम की हम्द करें,

क्यूँकि उसने हुक्म दिया और यह पैदा हो गए।

6 उसने इनको हमेशा से हमेशा तक के लिए क़ाईम किया है;

उसने अटल क़ानून मुक़र्रर कर दिया है।

7 ज़मीन पर से ख़ुदावन्द की हम्द करो

ऐ अज़दहाओं और सब गहरे समन्दरो!

8 ऐ आग और ओलो! ऐ बर्फ़ और कुहर ऐ तूफ़ानी हवा!

जो उसके कलाम की ता’लीम करती है।

9 ऐ पहाड़ो और सब टीलो!

ऐ मेवादार दरख़्तो और सब देवदारो!

10 ऐ जानवरो और सब चौपायो!

ऐ रेंगने वालो और परिन्दो!

11 ऐ ज़मीन के बादशाहो और सब उम्मतों!

ऐ उमरा और ज़मीन के सब हाकिमों!

12 ऐ नौजवानो और कुंवारियो!

ऐ बूढ़ों और बच्चो!

13 यह सब ख़ुदावन्द के नाम की हम्द करें,

क्यूँकि सिर्फ़ उसी का नाम मुम्ताज़ है।

उसका जलाल ज़मीन और आसमान से बुलन्द है।

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