2 जब शरीर या’नी मेरे मुख़ालिफ़ और मेरे दुश्मन,
मेरा गोश्त खाने को मुझ पर चढ़ आए तो वह ठोकर खाकर गिर पड़े।
3 चाहे मेरे ख़िलाफ़ लश्कर ख़ेमाज़न हो,
मेरा दिल नहीं डरेगा।
चाहे मेरे मुक़ाबले में जंग खड़ी हो, तोभी मैं मुतम’इन रहूँगा।
2 जब शरीर या’नी मेरे मुख़ालिफ़ और मेरे दुश्मन,
मेरा गोश्त खाने को मुझ पर चढ़ आए तो वह ठोकर खाकर गिर पड़े।
3 चाहे मेरे ख़िलाफ़ लश्कर ख़ेमाज़न हो,
मेरा दिल नहीं डरेगा।
चाहे मेरे मुक़ाबले में जंग खड़ी हो, तोभी मैं मुतम’इन रहूँगा।