1 ऐ ख़ुदावन्द! मेरा भरोसा तुझ पर,
मुझे कभी शर्मिन्दा न होने दे;
अपनी सदाक़त की ख़ातिर मुझे रिहाई दे।
1 ऐ ख़ुदावन्द! मेरा भरोसा तुझ पर,
मुझे कभी शर्मिन्दा न होने दे;
अपनी सदाक़त की ख़ातिर मुझे रिहाई दे।
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