1 ऐ ख़ुदावन्द! मेरा भरोसा तुझ पर,
मुझे कभी शर्मिन्दा न होने दे;
अपनी सदाक़त की ख़ातिर मुझे रिहाई दे।
2 अपना कान मेरी तरफ़ झुका, जल्द मुझे छुड़ा!
तू मेरे लिए मज़बूत चट्टान, मेरे बचाने को पनाहगाह हो!
3 क्यूँकि तू ही मेरी चट्टान और मेरा किला है;
इसलिए अपने नाम की ख़ातिर मेरी राहबरीऔर रहनुमाई कर।
4 मुझे उस जाल से निकाल ले जो उन्होंने छिपकर मेरे लिए बिछाया है,
क्यूँकि तू ही मेरा मज़बूत क़िला' है।
5 मैं अपनी रूह तेरे हाथ में सौंपता हूँ: ऐ ख़ुदावन्द!
सच्चाई के ख़ुदा; तूने मेरा फ़िदिया दिया है।