7 ऐ ख़ुदा, तेरी शफ़क़त क्या ही बेशक़ीमत है!
बनी आदम तेरे बाज़ुओं के साये में पनाह लेते हैं।
8 वह तेरे घर की ने’मतों से ख़ूब आसूदा होंगे,
तू उनको अपनी ख़ुशनूदी के दरिया में से पिलाएगा।
9 क्यूँकि ज़िन्दगी का चश्मा तेरे पास है;
तेरे नूर की बदौलत हम रोशनी देखेंगे।