7 ख़ुदावन्द में मुतम’इन रह, और सब्र से उसकी आस रख;
उस आदमी की वजह से जो अपनी राह में कामयाब होता
और बुरे मन्सूबों को अंजाम देता है, बेज़ार न हो।
7 ख़ुदावन्द में मुतम’इन रह, और सब्र से उसकी आस रख;
उस आदमी की वजह से जो अपनी राह में कामयाब होता
और बुरे मन्सूबों को अंजाम देता है, बेज़ार न हो।