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ज़बूर 38

1 ़ुवन, अपनहर ें िे,

और अपनें तमकर

2 ूँि ें लगैं,

और पर ै।

3 हर वजह िें िहत नहीं;

और वजह हडिों आरनहीं।

4 ूँि बदिगई,

और वह बड़े तरह िबहै।

5 वक़ू़ी वजह े,

़्ों बदबआतै, वह सडगए ैं।

6 ैं रदरऔर बहूँ;

ैं िभर तम करतिरतूँ।

7 ूँि कमर ें दरदरै,

और िें िहत नहीं।

8 ैं कमज़ोऔर बहचलूँ

और िवजह करहतरहा।

9 ़ुवन, तमनमनै,

और करहनिनहीं।

10 िधडकतै, घटै;

ों शनरही।

11 'अज़ीऔर बलें अलग गए,

और िखड़े

12 तलबगििैं,

और िशररत ें लते,

और िभर मकमनाँधतैं।

13 िैं बहरतरह नतनहीं,

ैं ूँतरह ुँनहीं लता।

14 बलि ैं उस आदमतरह ूँ िनहीं ा,

और िसकुँें मलमत ें नहीं।

15 ूँि ़ुवन,

उमै,

़ुवन, ़ुा!

जवा।

16 ूँि ैंकहा,

ि कहीं वह पर ़ुमनँ,

जब ाँिसलतै,

वह ़ितकबकरतैं।

17 ूँि ैं िरनूँ,

और बरबर मनै।

18 इसलिि ैं अपनबद़ािकरूँा,

और अपनवजह मगरहूँा।

19 िमन और बरदसैं,

और हक 'अदवत रखनबहगए ैं।

20 बदलबदकरतैं,

वह ़ािैं;

ूँि ैं रवकरतूँ।

21 ़ुवन, े!

़ुा, ो!

22 ़ुवन! नज!

मदद िजलकर!

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