4 "ऐ ख़ुदावन्द! ऐसा कर कि मैं अपने अंजाम से वाकिफ़ हो जाऊँ,
और इससे भी कि मेरी उम्र की मी’आद क्या है;
मैं जान लूँ कि कैसा फ़ानी हूँ!
5 देख, तूने मेरी उम्र बालिश्त भर की रख्खी है,
और मेरी ज़िन्दगी तेरे सामने बे हक़ीक़त है।
यक़ीनन हर इंसान बेहतरीन हालत में भी बिल्कुल बेसबात है सिलाह