8 ज़मीन की इन्तिहा के रहने वाले, तेरे मु’मुअजिज़ों से डरते हैं;
तू मतला' — ए — सुबह को और शाम को ख़ुशी बख़्शता है।
8 ज़मीन की इन्तिहा के रहने वाले, तेरे मु’मुअजिज़ों से डरते हैं;
तू मतला' — ए — सुबह को और शाम को ख़ुशी बख़्शता है।
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