26 क्यूँकि वह उसको जिसे तूने मारा है और जिनको तूने जख़्मी किया है,
उनके दुख का ज़िक्र करते हैं।
27 उनके गुनाह पर गुनाह बढ़ा;
और वह तेरी सदाक़त में दाख़िल न हों।
28 उनके नाम किताब — ए — हयात से मिटा
और सादिकों के साथ मुन्दर्ज न हों।
26 क्यूँकि वह उसको जिसे तूने मारा है और जिनको तूने जख़्मी किया है,
उनके दुख का ज़िक्र करते हैं।
27 उनके गुनाह पर गुनाह बढ़ा;
और वह तेरी सदाक़त में दाख़िल न हों।
28 उनके नाम किताब — ए — हयात से मिटा
और सादिकों के साथ मुन्दर्ज न हों।
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