1 ऐ मेरे लोगों मेरी शरी’अत को सुनो
मेरे मुँह की बातों पर कान लगाओ।
2 मैं तम्सील में कलाम करूँगा,
और पुराने पोशीदा राज़ कहूँगा,
3 जिनको हम ने सुना और जान लिया,
और हमारे बाप — दादा ने हम को बताया।
4 और जिनको हम उनकी औलाद से पोशीदा नहीं रख्खेंगे;
बल्कि आइंदा नसल को भी ख़ुदावन्द की ता’रीफ़,
और उसकी कु़दरत और 'अजाईब जो उसने किए बताएँगे।