4 और जिनको हम उनकी औलाद से पोशीदा नहीं रख्खेंगे;
बल्कि आइंदा नसल को भी ख़ुदावन्द की ता’रीफ़,
और उसकी कु़दरत और 'अजाईब जो उसने किए बताएँगे।
5 क्यूँकि उसने या’कू़ब में एक शहादत क़ाईम की,
और इस्राईल में शरी’अत मुक़र्रर की,
जिनके बारे में उसने हमारे बाप दादा को हुक्म दिया,
कि वह अपनी औलाद को उनकी ता’लीम दें,
6 ताकि आइंदा नसल, या’नी वह फ़र्ज़न्द जो पैदा होंगे,
उनको जान लें:और वह बड़े होकर अपनी औलाद को सिखाएँ,
7 कि वह ख़ुदा पर उम्मीद रखें, और उसके कामों को भूल न जाएँ,
बल्कि उसके हुक्मों पर 'अमल करें;