1 ऐ ख़ुदावन्द हमारे रब तेरा नाम तमाम ज़मीन पर कैसा बुज़ु़र्ग़ है!
तूने अपना जलाल आसमान पर क़ाईम किया है।
3 जब मैं तेरे आसमान पर जो तेरी दस्तकारी है,
और चाँद और सितारों पर जिनको तूने मुक़र्रर किया, ग़ौर करता हूँ।
4 तो फिर इंसान क्या है कि तू उसे याद रख्खे,
और बनी आदम क्या है कि तू उसकी ख़बर ले?