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Salmos 84

1 लशकरों ़ुवन! घर िलकश ैं!

2 ़ुवनरगों ै,

बलि चली, िऔर ि़ि़ुि़ुललकरतैं।

3 लशकरों ़ुवन! दशहऔर ़ुा!

मजबहों रयअपनआशिा,

और अबअपनिोंसलबनिा,

जहाँ वह अपनबचों रखे।

4 रक ैं वह घर ें रहतैं,

वह हमा’करेंे। ि

5 रक वह आदमी, िसकै,

िसकिें िें ैं।

6 वह कर उसचशों जगह बनैं,

बलि पहलिउसबरकतों ा’कर ै।

7 वह पर ैं;

उनमें हर एक िें ़ुमऩिै।

8 ़ुवन, लशकरों ़ुा,

ा’़ू़ुा! लगा! ि

9 ़ुा! हमिपर! ;

और अपनममहरपर नजर कर

10 ूँि रगों ें एक िहज़ाहतर ै।

ैं अपऩुघर दरबा,

शररत े़ों ें बसऩ्पसकरूँा।

11 ूँि ़ुवऩुा, आफऔर ै;

़ुवनऔर जलबख़्वह तरे’मत रखा।

12 लशकरों ़ुवन!

रक वह आदमिसकभरपर ै।

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