1 जो हक़ता’ला के पर्दे में रहता है,
वह क़ादिर — ए — मुतलक़ के साये में सुकूनत करेगा।
2 मैं ख़ुदावन्द के बारे में कहूँगा, "वही मेरी पनाह और मेरा गढ़ है;
वह मेरा ख़ुदा है, जिस पर मेरा भरोसा है।"
3 क्यूँकि वह तुझे सय्याद के फंदे से,
और मुहलिक वबा से छुड़ाएगा।
4 वह तुझे अपने परों से छिपा लेगा,
और तुझे उसके बाजु़ओं के नीचे पनाह मिलेगी,
उसकी सच्चाई ढाल और सिपर है।