1 क्या ही भला है, ख़ुदावन्द का शुक्र करना,
और तेरे नाम की मदहसराई करना; ऐ हक़ ता’ला!
2 सुबह को तेरी शफ़क़त का इज़्हार करना,
और रात को तेरी वफ़ादारी का,
3 दस तार वाले साज़ और बर्बत पर,
और सितार पर गूंजती आवाज़ के साथ।
1 क्या ही भला है, ख़ुदावन्द का शुक्र करना,
और तेरे नाम की मदहसराई करना; ऐ हक़ ता’ला!
2 सुबह को तेरी शफ़क़त का इज़्हार करना,
और रात को तेरी वफ़ादारी का,
3 दस तार वाले साज़ और बर्बत पर,
और सितार पर गूंजती आवाज़ के साथ।