1 आओ हम ख़ुदावन्द के सामने नग़मासराई करे!
अपनी नजात की चट्टान के सामने खु़शी से ललकारें।
2 शुक्रगुज़ारी करते हुए उसके सामने में हाज़िर हों,
मज़मूर गाते हुए उसके आगे ख़ुशी से ललकारें।
3 क्यूँकि ख़ुदावन्द ख़ुदा — ए — 'अज़ीम है,
और सब इलाहों पर शाह — ए — 'अज़ीम है।
4 ज़मीन के गहराव उसके क़ब्ज़े में हैं;
पहाड़ों की चोटियाँ भी उसी की हैं।
5 समन्दर उसका है, उसी ने उसको बनाया,
और उसी के हाथों ने खु़श्की को भी तैयार किया।
6 आओ हम झुकें और सिज्दा करें,
और अपने खालिक़ ख़ुदावन्द के सामने घुटने टेकें!