19 ख़ुदावन्द ने अपना तख़्त आसमान पर क़ाईम किया है,
और उसकी सल्तनत सब पर मुसल्लत है।
20 ऐ ख़ुदावन्द के फ़िरिश्तो, उसको मुबारक कहो,
तुम जो ज़ोर में बढ़ कर हो और उसके कलाम की आवाज़ सुन कर उस पर 'अमल करते हो।
21 ऐ ख़ुदावन्द के लश्करो, सब उसको मुबारक कहो!
तुम जो उसके ख़ादिम हो और उसकी मर्ज़ी बजा लाते हो।
22 ऐ ख़ुदावन्द की मख़लूक़ात, सब उसको मुबारक कहो!
तुम जो उसके तसल्लुत के सब मकामों में ही। ऐ मेरी जान,
तू ख़ुदावन्द को मुबारक कह!