1 मैं अपनी आँखें पहाड़ों की तरफ उठाऊगा;
मेरी मदद कहाँ से आएगी?
2 मेरी मदद ख़ुदावन्द से है,
जिसने आसमान और ज़मीन को बनाया।
7 ख़ुदावन्द हर बला से तुझे महफूज़ रख्खेगा,
वह तेरी जान को महफूज़ रख्खेगा।
8 ख़ुदावन्द तेरी आमद — ओ — रफ़्त में,
अब से हमेशा तक तेरी हिफ़ाज़त करेगा।