3 तूने मेरे दिल को आज़मा लिया है, तूने रात को मेरी निगरानी की;
तूने मुझे परखा और कुछ खोट न पाया,
मैंने ठान लिया है कि मेरा मुँह ख़ता न करे।
4 इंसानी कामों में तेरे लबों के कलाम की मदद से
मैं ज़ालिमों की राहों से बाज़ रहा हूँ।
5 मेरे कदम तेरे रास्तों पर क़ाईम रहे हैं,
मेरे पाँव फिसले नहीं।