1 मैंने सब्र से ख़ुदावन्द पर उम्मीद रख्खी
उसने मेरी तरफ़ माइल होकर मेरी फ़रियाद सुनी।
2 उसने मुझे हौलनाक गढ़े
और दलदल की कीचड़ में से निकाला,
और उसने मेरे पाँव चट्टान पर रख्खे
और मेरी चाल चलन क़ाईम की
1 मैंने सब्र से ख़ुदावन्द पर उम्मीद रख्खी
उसने मेरी तरफ़ माइल होकर मेरी फ़रियाद सुनी।
2 उसने मुझे हौलनाक गढ़े
और दलदल की कीचड़ में से निकाला,
और उसने मेरे पाँव चट्टान पर रख्खे
और मेरी चाल चलन क़ाईम की